'ऑपरेशन कनविक्शन' की बड़ी जीत: पॉक्सो एक्ट के दोषी को 20 वर्ष की सजा - अप्राकृतिक दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष की कठोर कैद, कोर्ट ने लगाया 35 हजार का जुर्माना - होली, रमजान और बोर्ड परीक्षा को लेकर पुलिस सख्त: आईजी विंध्याचल परिक्षेत्र ने की समीक्षा - वेतन से एकमुश्त के बजाय किस्तों में काटें टीडीएस: जिलाधिकारी - आवास योजना में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: वसूली करने वालों पर दर्ज होगी FIR'ऑपरेशन कनविक्शन' की बड़ी जीत: पॉक्सो एक्ट के दोषी को 20 वर्ष की सजा - अप्राकृतिक दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष की कठोर कैद, कोर्ट ने लगाया 35 हजार का जुर्माना - होली, रमजान और बोर्ड परीक्षा को लेकर पुलिस सख्त: आईजी विंध्याचल परिक्षेत्र ने की समीक्षा - वेतन से एकमुश्त के बजाय किस्तों में काटें टीडीएस: जिलाधिकारी - आवास योजना में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: वसूली करने वालों पर दर्ज होगी FIR

अप्राकृतिक दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष की कठोर कैद, कोर्ट ने लगाया 35 हजार का जुर्माना

सोनभद्र कोर्ट का फैसला: 10 वर्षीय बालक के साथ हुई दरिंदगी के मामले में करीब 4 साल बाद मिला न्याय

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Tuesday, February 17, 2026

सोनभद्र,अमान खान ब्यूरो चीफ। जनपद के चोपन थाना क्षेत्र में करीब 3 वर्ष 11 माह पूर्व एक 10 वर्षीय बालक के साथ हुए अप्राकृतिक दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अमित वीर सिंह की अदालत ने आरोपी विजय उर्फ टीपू साहनी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

जुर्माना और क्षतिपूर्ति:

न्यायालय ने दोषी पर 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे 2 माह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। विशेष बात यह है कि अर्थदंड की कुल राशि में से 20 हजार रुपये पीड़ित बालक को सहायता के रूप में प्रदान किए जाएंगे।

क्या था पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 20 मार्च 2022 की शाम की है। चोपन थाना क्षेत्र निवासी पीड़ित के पिता ने तहरीर दी थी कि उनके नाबालिग बेटे को कुरहुल निवासी विजय उर्फ टीपू साहनी ने चने के खेत में बुलाकर उसके साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किया। बच्चे ने घर आकर अपनी मां को आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट, एससी/एसटी एक्ट और अप्राकृतिक दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज किया था।

8 गवाहों और सबूतों के आधार पर सजा:

विवेचना के दौरान पुलिस ने पुख्ता सबूत पेश किए और अदालत में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और 8 गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद 27 वर्षीय विजय को दोषी पाया। अभियोजन की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने प्रभावी बहस की।

​अदालत ने आदेश दिया कि दोषी द्वारा जेल में बिताई गई पिछली अवधि को उसकी मूल सजा में समाहित किया जाएगा।

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