सोनभद्र ब्यूरो। जनपद में मानवाधिकारों के संरक्षण का दावा करने वाला संगठन ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ अब पूरी तरह बिखरता नजर आ रहा है। वर्तमान जिलाध्यक्ष मुमताज अली के इस्तीफे के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि संगठन के भीतर की दरार अब एक बड़े बिखराव में बदल चुकी है। स्थानीय जानकारों और संगठन से जुड़े सूत्रों की मानें तो अब जिले में संगठन के पास कोई ‘नया चेहरा’ या विकल्प शेष नहीं बचा है, जिससे इकाई का पुनर्गठन हो सके।
संगठन में बिखराव की असली वजह
मुमताज अली ने अपने त्यागपत्र में ‘वैचारिक मतभेद’ और ‘आपसी खींचतान’ का जो जिक्र किया है, वह इस बात की तस्दीक करता है कि संगठन के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था। जिलाध्यक्ष के हटते ही पूरी जिला इकाई ताश के पत्तों की तरह ढह गई है। संगठन में आए इस संकट के बाद अब सोनभद्र में किसी नए नेतृत्व की उम्मीद लगभग समाप्त हो गई है।
प्रमुख बिंदु जिन्होंने संगठन को अंत की ओर धकेला:
- नेतृत्व का अभाव: जिलाध्यक्ष के इस्तीफे के बाद अब जिले में ऐसा कोई प्रभावशाली व्यक्तित्व नहीं दिख रहा जो संगठन की कमान संभाल सके।
- आंतरिक गुटबाजी: पिछले लंबे समय से संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों ने कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ दिया, जिसका नतीजा आज पूर्ण बिखराव के रूप में सामने है।
- विश्वास का संकट: मुमताज अली जैसे सक्रिय चेहरे के हट जाने से संगठन की विश्वसनीयता पर भी गहरा असर पड़ा है।
निष्कर्ष: अस्तित्व की लड़ाई
सोनभद्र जैसे संवेदनशील जिले में, जहाँ मानवाधिकारों के मुद्दे पर एक मजबूत संगठन की आवश्यकता थी, वहाँ ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ का इस तरह टूटना चर्चा का विषय है। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जिले में इस संगठन का अध्याय अब समाप्ति की ओर है और किसी नए चेहरे के आने की संभावना शून्य है।






