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सोनभद्र: ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ के काले कारनामों पर टिकी पत्रकारो की नजर, प्रशासन से पूछे 7 तीखे सवाल।

'समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन' के खिलाफ आरटीआई से खुला मोर्चा, भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के लगे गंभीर आरोप

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Wednesday, January 14, 2026

राबर्ट्सगंज (सोनभद्र)। जनपद में मानवाधिकार के नाम पर संचालित संस्था के कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गए हैं। ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ (रजि. नं- S/212/012) की संदिग्ध गतिविधियों और संस्था के भीतर चल रहे कथित ‘पदों के खेल’ को लेकर जिला प्रशासन से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जवाब मांगा गया है। इस आरटीआई आवेदन ने संगठन के भीतर मचे घमासान और भ्रष्टाचार के आरोपों को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है।

पदों की लगती है ‘बोली’, वसूली का आरोप
आरटीआई में सबसे बड़ा प्रहार संस्था के भीतर “पदों की खरीद-फरोख्त” को लेकर किया गया है। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों और संस्था के पूर्व जिला महासचिव अमान खान व नगर उपाध्यक्ष राजू अग्रहरि के इस्तीफों का हवाला देते हुए पूछा गया है कि क्या प्रशासन ने ‘पदों की खुली बोली’ और अवैध वसूली के इन गंभीर आरोपों पर संज्ञान लिया है?

सरकारी प्रतीकों का ‘अवैध’ मोह!
संस्था पर आरोप है कि यह निजी एसोसिएशन अपने लेटरहेड और बैनरों पर “भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त” लिखकर आम जनता और प्रशासन को भ्रमित कर रही है। साथ ही, सरकारी सील और प्रतीकों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरटीआई के जरिए पूछा गया है कि किस नियम के तहत एक निजी संस्था को इन सरकारी शब्दावलियों के प्रयोग की अनुमति मिली?

रडार पर पदाधिकारी: चरित्र सत्यापन की मांग
संगठन के रसूखदार पदाधिकारियों—जिला प्रभारी इस्तियाक अली अंसारी, पूर्वांचल अध्यक्ष एमडी राशिद, जिलाध्यक्ष अल्पसंख्य प्रकोष्ठ जावेद अली, जिला सचिव लॉरेंस एंथोनी और जिला अध्यक्ष मुमताज अली सहित अन्य सक्रिय सदस्यों के ‘पुलिस वेरिफिकेशन’ (चरित्र सत्यापन) की मांग की गई है। यह सवाल उठाया गया है कि समाज सेवा के नाम पर सक्रिय इन चेहरों का पिछला रिकॉर्ड क्या है और क्या प्रशासन के पास इनके चरित्र सत्यापन की कोई रिपोर्ट मौजूद है।

बिना एनओसी (NOC) के चल रहा कार्यालय?
छपका (राबर्ट्सगंज) स्थित संस्था के कार्यालय के संचालन पर भी सवालिया निशान लगे हैं। क्या इस कार्यालय के लिए नगर पालिका या अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया है? इसके साथ ही, बिना किसी पूर्व सूचना के तहसील स्तर तक कमेटी विस्तार और सदस्यता के नाम पर की जा रही धन उगाही की वैधानिकता को भी चुनौती दी गई है।

पंजीकरण निरस्तीकरण की लटकी तलवार
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी कार्यालय से पूछा है कि क्या इन अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की खबरों के आधार पर संस्था का पंजीकरण रद्द करने के लिए ‘रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज’ को कोई संस्तुति भेजी गई है?

क्या कहता है प्रशासन?
फिलहाल, जन सूचना अधिकारी (DM कार्यालय) को दिए गए इस प्रार्थना पत्र के बाद विभाग में हलचल तेज है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन बिंदुओं पर क्या जवाब देता है और दोषी पाए जाने पर संस्था के विरुद्ध क्या कार्यवाही की जाती है।

खबर का असर: > इस आरटीआई के दाखिल होने के बाद से संस्था के कई सदस्यों में बेचैनी देखी जा रही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि मानवाधिकार के नाम पर निजी स्वार्थ सिद्ध करने वाली संस्थाओं पर लगाम कसना जरूरी है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी कार्यालय के जवाब पर टिकी हैं।

“इस संबंध में जब संस्था के कुछ पदाधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनकी ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। प्रशासन के जवाब के बाद स्थिति और भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।”

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