नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने उन्नत इस्पात निर्माण में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए विशिष्ट इस्पात के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तीसरे चरण (पीएलआई 1.2) का शुभारंभ किया है। इस पहल की घोषणा केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने की, जिन्होंने इसे भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की यात्रा में एक बहुत बड़ी सफलता बताया।
इस अवसर पर बोलते हुए श्री कुमारस्वामी ने कहा कि पीएलआई योजना “आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक उज्जवल स्तंभ है, जिसका उद्देश्य भारत को औद्योगिक उत्पादन के हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और प्रौद्योगिकी रूप से उन्नत बनाना है।” जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित विशिष्ट इस्पात के लिए पीएलआई योजना को 6,322 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ शुरू किया गया था, ताकि रक्षा, एयरोस्पेस, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले उच्च मूल्य, उच्च श्रेणी के इस्पात के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा सके।
अपनी शुरुआत से अब तक इस योजना ने 43,874 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं आकर्षित की हैं, 30,760 प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित की हैं तथा भारत में 14.3 मिलियन टन नई विशिष्ट इस्पात क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2025 तक पहले दो दौर में भाग लेने वाली कंपनियां पहले ही 22,973 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी हैं और 13,284 नौकरियां सृजित की जा चुकी हैं।
मंत्री महोदय ने कहा, “पहले दो चरणों की प्रतिक्रिया अत्यधिक उत्साहजनक रही है। यह सफलता भारत के सुधार-उन्मुख और उद्योग-संचालित नीतिगत ढांचे की मजबूती को दर्शाती है।” नया लॉन्च किया गया पीएलआई 1.2 चरण सुपर अलॉय, सीआरजीओ स्टील, स्टेनलेस स्टील लांग और सपाट उत्पाद, टाइटेनियम मिश्र धातु और कोटेड स्टील्स जैसी उन्नत और उभरती श्रेणियों में नए निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से है। ये सामग्रियां अगली पीढ़ी के औद्योगिक और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक हैं।
एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि तीसरे दौर से एमएसएमई और मौजूदा उत्पादकों के लिए नए रास्ते सामने आएंगे, जिन्होंने पिछले चरणों के बाद अपनी क्षमताओं का विस्तार या उन्नयन किया है। कुमारस्वामी ने कहा, “पीएलआई 1.2 को उच्च श्रेणी के इस्पात उत्पादन के लिए वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा को तेज करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।” उन्होंने कहा कि नया चरण भारतीय इस्पात निर्माताओं को वैश्विक मंच पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
भारत के दुनिया के शीर्ष इस्पात उत्पादकों में से एक के रूप में लगातार उभरने के साथ पीएलआई योजना से वैश्विक मूल्य श्रृंखला में देश की भूमिका और मज़बूत होने की उम्मीद है। इसका मुख्य ध्यान निर्यात-आधारित विकास, प्रौद्योगिकी संबंधी नवाचार और उत्पादन को बनाए रखने पर होगा। मंत्री महोदय ने कहा, “इस पहल के माध्यम से हमारा लक्ष्य न केवल भारत के लिए इस्पात का उत्पादन करना है, बल्कि भारत से विश्व को आपूर्ति करना है।”
यह योजना भारत को विनिर्माण क्षेत्र की शक्ति बनाने के व्यापक सरकारी विजन के अनुरूप है, जो स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और उच्च मूल्य संवर्धन के जरिये पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करती है। कुमारस्वामी ने दोहराया कि सरकार एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी इस्पात उद्योग के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीएलआई 1.2 चरण आत्मनिर्भर भारत, 2047 तक विकसित भारत और भारत के नेट ज़ीरो 2070 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा, “भारतीय इस्पात की कहानी ही भारत की प्रगति की कहानी है- आकांक्षा से उपलब्धि तक की यात्रा, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से प्रेरित है।” अधिकारियों को उम्मीद है कि निरंतर निवेश प्रवाह, प्रौद्योगिकी साझेदारी और निर्यात विस्तार के साथ भारत न केवल अपनी घरेलू इस्पात मांग को पूरा करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में उन्नत इस्पात उत्पादों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता भी बनेगा।







