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सोनभद्र: राष्ट्रीय ध्वज हमारी आशाओं और गौरव का प्रतीक, जिलाधिकारी ने बताए झंडा संहिता के नियम

दिन-रात फहराया जा सकता है तिरंगा; फटे या मैले झंडे का प्रदर्शन अपमानजनक, नियम उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Saturday, February 21, 2026

सोनभद्र (अमान खान ब्यूरो चीफ): ​जिलाधिकारी श्री बी.एन. सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और ‘भारतीय झंडा संहिता’ के नियमों को लेकर जनपद वासियों को जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारत के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिरूप है, जिसका आदर करना हर नागरिक का परम कर्तव्य है।

झंडा फहराने से जुड़े प्रमुख नियम:

  • बनावट और सामग्री: अब हाथ से बुने हुए के साथ-साथ मशीन से बने और पॉलिएस्टर के कपड़ों से निर्मित राष्ट्रीय ध्वज की भी अनुमति है। झंडा सूती, ऊनी, सिल्क या खादी का हो सकता है।
  • अनुपात और आकार: राष्ट्रीय झंडा हमेशा आयताकार होगा। इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात अनिवार्य रूप से 3:2 होना चाहिए।
  • दिन-रात फहराने की छूट: भारतीय झंडा संहिता, 2002 में संशोधन के बाद अब खुले में या जनता के घरों पर झंडा दिन और रात (24 घंटे) फहराया जा सकता है।
  • मर्यादा और सम्मान: फहराया गया झंडा फटा या मैला नहीं होना चाहिए। इसे हमेशा सम्मानजनक स्थिति में ही प्रदर्शित किया जाए।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान:

  • ​किसी भी अन्य झंडे को राष्ट्रीय ध्वज के साथ एक ही डंडे (ध्वज-दंड) पर न फहराया जाए।
  • ​राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल जैसे विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों के अलावा किसी भी निजी वाहन पर झंडा लगाना प्रतिबंधित है।
  • ​राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत झंडे का अपमान करना दंडनीय अपराध है।

​जिलाधिकारी ने बताया कि विस्तृत जानकारी गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट www.mha.gov.in पर भी उपलब्ध है।

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