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सोनभद्र: नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को मिली उम्रकैद

अदालत ने दोषियों पर लगाया ₹1.11 लाख का जुर्माना; शेष प्राकृत जीवनकाल तक जेल में रहेंगे राजपति और मन्नू

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Sunday, February 8, 2026

सोनभद्र (अमान खान ब्यूरो चीफ)। सोनभद्र के विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) के अपर सत्र न्यायाधीश अमित वीर सिंह ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म और व्यपहरण के दो दोषियों, राजपति (40 वर्ष) और मन्नू (42 वर्ष) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘आजीवन कारावास’ का तात्पर्य दोषियों के शेष प्राकृत जीवनकाल तक के लिए कारावास होगा।

क्या था मामला?

​अभियोजन कथानक के अनुसार, ग्राम कोहरथा निवासी सुरेन्द्र धरकार की नाबालिग पुत्री (करीब 13 वर्ष) के साथ यह घटना 27 अगस्त 2019 को हुई थी। पीड़िता जब स्कूल से घर लौट रही थी, तब राजपति और मन्नू ने मोटरसाइकिल से उसका व्यपहरण किया और उसे बंधक बनाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। मामले में पुलिस द्वारा प्रारंभिक हिलाहवाली के बाद मण्डलायुक्त विन्ध्यांचल के हस्तक्षेप पर रिपोर्ट दर्ज की गई थी।

न्यायालय का फैसला और जुर्माना

​न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद राजपति और मन्नू को दोषी पाया।

  • धारा 5जी/6 (पॉक्सो एक्ट): प्रत्येक को कठिन आजीवन कारावास और ₹50,000-₹50,000 अर्थदण्ड।
  • धारा 363 (व्यपहरण): प्रत्येक को 4 वर्ष का कारावास और ₹5,000-₹5,000 अर्थदण्ड।
  • धारा 342 (बंधक बनाना): प्रत्येक को 6 माह का कारावास और ₹500-₹500 अर्थदण्ड।

​कुल ₹1,11,000 के अर्थदण्ड में से ₹85,000 की धनराशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही, न्यायालय ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अतिरिक्त प्रतिकर की सिफारिश भी की है।

अभियोजन की प्रभावी पैरवी

​अभियोजन की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्य प्रकाश त्रिपाठी और नीरज सिंह ने प्रभावी बहस की। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि समाज में कड़ा संदेश भेजने के लिए इस प्रकृति के अपराधों में कठोरतम दण्ड आवश्यक है।

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