सोनभद्र : स्थानीय मेडिकल कॉलेज वर्तमान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। पिछले दो वर्षों से संचालित इस संस्थान को विरासत में एक जर्जर भवन मिला था, जिसे प्रशासन जैसे-तैसे चलाने का प्रयास कर रहा है। संसाधनों की भारी कमी और प्रशासनिक बाध्यताओं के बावजूद, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन सीमित बजट में बेहतर सुविधाएं देने का संघर्ष कर रहा है।
अस्तित्व का संकट और जर्जर बुनियादी ढांचा
मेडिकल कॉलेज के तृतीय चरण में होने के बावजूद, बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। पूर्व में मात्र 100 बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल को अथक प्रयासों से 350 बेड तक पहुंचाया गया है और कई प्रमुख विभागों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। वर्तमान में स्त्री रोग (Obstetrics and Gynaecology) एवं बाल रोग विभाग अभी भी उसी पुराने और असुरक्षित भवन में संचालित हो रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है।
बजट की कमी और निर्माणाधीन भवन
स्त्री रोग एवं बाल रोग विभाग के लिए नया भवन निर्माणाधीन है, लेकिन कार्य की गति बजट की उपलब्धता पर टिकी है। नए फर्नीचर, बेड और आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए सरकार से अगले बजट की स्वीकृति अनिवार्य है। जब तक वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं होती, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी क्षमता से संचालित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
MCH सेंटर पर निजी संस्था का कब्जा: जनहित की अनदेखी
सबसे गंभीर मुद्दा मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर स्थित एमसीएच (MCH) सेंटर का है, जिसे वर्तमान में एक निजी संस्था द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि सरकारी परिसर में निजी संस्था फल-फूल रही है, जबकि सरकारी विभाग जगह के अभाव में जर्जर कमरों में काम करने को मजबूर हैं।
सरकार से स्पष्ट मांग
मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग ने पुरजोर मांग की है कि:
1.निजी संस्था द्वारा संचालित MCH सेंटर के भवन को तत्काल मेडिकल कॉलेज के सुपुर्द किया जाए, ताकि वहां स्त्री रोग और बाल रोग जैसे महत्वपूर्ण विभाग शिफ्ट किए जा सकें।
2.निर्माणाधीन भवन के लिए रुका हुआ बजट प्राथमिकता के आधार पर जारी किया जाए।
3.मरीजों की सुरक्षा और बेहतर उपचार के लिए आधुनिक बेड और फर्नीचर की त्वरित व्यवस्था हो।
यह केवल कॉलेज का प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। यदि सरकार और प्रशासन ने समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो जर्जर भवन में चल रहे विभाग किसी भी समय जान-माल की हानि का कारण बन सकते हैं।







