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साइबर ठगी करने को लेकर फर्जी काल सेंटर संचालित करने बाले दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर किया बड़ा खुलासा

विदेश से सीखकर आए थे गेमिंग प्रोग्राम और लोगों को लगा दिया करोड़ों का चूना

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Tuesday, February 10, 2026

Police made a big disclosure by arresting two youths who were running a fake call center for cyber fraud.

पूरनपुर /पीलीभीत। थाना घुंघचिहाई पुलिस ने साइबर ठगी व फर्जी काल सेंटर संचालित करने बाले दो युवकों को धर-दबोचा है। पुलिस द्वारा साइबर ठगी और धरपकड़ को लेकर चलाए जा रहे अभियान के दौरान सर्विलांस टीम की मदद से घुंघचिहाई पुलिस ने दो आरोपी और धर दबोचे हैं जिसका पुलिस अधीक्षक ने मंगलवार को खुलासा किया है। उनके पास से सात मोबाइल, एक लैपटॉप, एक पासपोर्ट समेत अन्य सामान की बरामदगी की गई है।

बीते दिनों फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर गेमिंग एप (एविएटर, रम्मी) के जरिए ठगी करने वाले दर्जनभर जालसाजों को पुलिस जेल भेज चुकी है। जहां साइबर सेल की मदद से घुंघचिहाई पुलिस ने दो और आरोपी पकड़े हैं। बताते हैं कि घुंघचिहाई पुलिस को विवेचना के दौरान संज्ञान में आया कि गिरोह के सरगना हर्षित उर्फ तनिश निवासी भोपाल और आशुतोष मिश्रा उर्फ आशु उर्फ पंकज निवासी दिल्ली जोकि मूल रुप से उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर जनपद का रहने वाला है। जो कि पुनः फिर से सक्रिय हो चुके हैं। इसको लेकर पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुरागरसी की और साक्ष्य जुटाए।

जिसके बाद नौ फरवरी को आरोपी हर्षित उर्फ तनिश को भोपाल से धर दबोचा। उसके पास से तीन मोबाइल, एक लैपटॉप बरामद किया गया। वहीं, दिल्ली के मालवीय नगर में दबिश दी गई और आरोपी आशुतोष कुमार को भी पकड़ लिया गया। जहां उसके पास से मोबाइल समेत अन्य सामान की बरामदगी की गई। दोनों को टीम पुलिस पीलीभीत लेकर आई और पूछताछ की। आरोपी पूर्व में हुई धरपकड़ की कार्रवाई के दौरान फरार हो गए थे। फिर तनिश ने अपना नया ठिकाना भोपाल और आशुतोष ने मालवीय नगर दिल्ली में गिरोह का संचालन शुरू कर रहा था।

उक्त दोनों पूर्व में दुबई से फर्जी गेमिंग एवं कॉल सेंटर चलाना सीखकर आए थे। इन्होंने भी खुद कॉल सेंटर में पूर्व में नौकरी की थी। होटलों में फर्जी आधार कार्ड लगाकर रुका करते थे, ताकि असल पहचान उजागर न हो। आरोपियों ने दुबई में काम सीखा और फिर गिरोह बनाकर ठगी शुरू कर दी थी। कोई बैंक अकाउंट तो कोई सदस्य ब्लैक में खुरचे हुए सिम कार्ड मुहैया कराता था। लोगों को पहले रकम जिताकर भेजते थे और फिर लत पड़ने पर जालसाजी का खेल शुरू देते थे। पूर्व में अमृतपाल और मनजीत के गिरोह के पकड़े जाने के बाद उक्त आरोपी भाग गए थे और अब यह उक्त बेफ्रिक होकर पुराने अड़्डों पर रहने लगे थे। शुरुआत में गेम जिताकर रकम देते और फिर खातों की डिटेल जुटाकर रकम उड़ा लिया करते थे।

5.54 करोड़ से अधिक इन्वेस्टमेंट, प्रतिमाह दो करोड़ मुनाफा बताते हैं कि सरगना दुबई और दिल्ली से गिरोह का संचालन कर रहे हैं। अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद इन लोगों ने बेवसाइट की लॉगइन आईडी व पासवर्ड ब्लॉक कर दिया था। चक्र खड़का गिरोह के लिए अकाउंट मेनटेन किया करता था। लैप्टॉप में मौजूद फेयरप्ले एप में गेम खेलने वाले करीब 50 हजार लोगों ने ऑनलाइन किया था, जिसमें 20 हजार ने रुपये इनवेस्ट किए थे।

अभी तक की जांच पड़ताल से पता चला कि विक्रांत उर्फविक्की और चक्र खड़का के मोबाइल में मौजूद 11739 नंबर से करीब 05 करोड़ 54 लाख 40 हजार 242 रुपये इन्वेस्टमेंट किए गए थे। प्रतिदिन करीब 15 से 16 लाख रुपये का गेम लोगों को खिलवाते थे। इसमें सात-आठ लाख रुपये कस्टमर को वापस करते और बकाया मुनाफा में ठगी करते थे। यह प्रतिमाह करीब दो करोड़ का मुनाफा ठगी के माध्यम से कमाते थे। ठगी से कमाए गए रुपयों से महंगे शौक पूरा करते थे। अभी भी पुलिस बरामद हुए मोबाइल लैपटाप की मदद से साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।

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