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संरक्षण की जगह न होने के कारण पशुओं को पकड़वाने से कतरा रहे अधिकारी

किसान और राहगीरों के लिए मुसीबत बन रही आवारा पशुओं

EDITED BY: DAT ब्यूरो चीफ

UPDATED: Monday, September 8, 2025

पूरनपुर/पीलीभीत।सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़ने के बाद उन्हें संरक्षित करने के लिए गौशालाओं में जगह नहीं है।अधिकांश गौशालाओं में क्षमता से अधिक गौवंश संरक्षित किए गए हैं।ऐसे में अधिकारियों के आदेश के बाद भी आवारा पशुओं को नहीं पकड़ा जा रहा है। ग्राम प्रधान और ग्रामीण लंबे समय से गौशालाओं के निर्माण की मांग कर रहे हैं।

पूरनपुर तहसील क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।अफसर बेसहारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में संरक्षित कराने का दावा कर रहे हैं।इन तमाम दावों के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों आवारा गोवंश सड़कों पर मौत बनकर घूम रहे हैं। पशुओं को संरक्षित करने के लिए पूरनपुर क्षेत्र के गांव हरीपुर फुलहर,ककरौआ, अभयपुर मुस्तकिल,फत्तेपुर,कजरी निरंजनपुर, परशुरामपुर, रुद्रपुर, गढाकला, जलेश्वर उर्फ जगतपुर, सुल्तानपुर सहित एक दर्जन गौशालाओं का संचालन किया जा रहा है।

इन गौशालाओं में कुल 1048 पशुओं को संरक्षित किया गया।इन गौशालाओं में क्षमता से अधिक पशु संरक्षित हैं। इससे पशुओं की देखरेख ढंग से नहीं हो पा रही है।ओवर सैचुरेटेड (अधिकतम सीमा से भी अधिक मात्रा) गौशालाओं में अन्य पशुओं को संरक्षित करना संभव नहीं है।जिले के जिम्मेदार अफसर सड़कों पर घूम रहे पशुओं को पकड़वाने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में ग्राम पंचायत अधिकारियों में पशुओं को पकड़वाने के लिए पसोपेश की स्थिति बनी हुई है।अधिकारियों की लापरवाही से किसानों को आवारा पशुओं की समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नई गौशालाओं का निर्माण कराया जाए और मौजूदा आश्रय स्थलों की क्षमता बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को अपनी फसलें बचाने और आम राहगीरों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

कुछ गौशालाओं में क्षमता से अधिक पशु है।इसके बाद भी जिन गौशालाओं में जगह है वहां पशुओं को संरक्षित कराया जा रहा है। बेसहारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।अस्थायी गौशालाओं का निर्माण भी कराया जा रहा है।

रोहित भारती, डीपीआरओ पीलीभीत।

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