सोनभद्र: मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर गंभीर आरोप, बिना डिग्री के अस्पताल चलाने को संरक्षण देने का मामला गर्माया - थाना शक्तिनगर पुलिस की बड़ी सफलता, चोरी की 50 मीटर केबल तार (कॉपर) के साथ 02 अभियुक्त गिरफ्तार- - थाना कोन पुलिस को मिली बड़ी सफलता, महिला का भेष बनाकर हाईवे पर लूट करने वाले गिरोह का ₹10,000 का इनामिया शातिर बदमाश पुलिस मुठभेड़ में घायल/गिरफ्तार, कब्जे से अवैध असलहा व कारतूस बरामद- - शोक समाचार: जन अधिकार पार्टी के वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सिंह मौर्य का निधन, पार्टी में शोक की लहर - सोनभद्र पुलिस में बड़ी कार्रवाई: लापरवाही पर गाज, चार थाना प्रभारी लाइनहाजिरसोनभद्र: मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर गंभीर आरोप, बिना डिग्री के अस्पताल चलाने को संरक्षण देने का मामला गर्माया - थाना शक्तिनगर पुलिस की बड़ी सफलता, चोरी की 50 मीटर केबल तार (कॉपर) के साथ 02 अभियुक्त गिरफ्तार- - थाना कोन पुलिस को मिली बड़ी सफलता, महिला का भेष बनाकर हाईवे पर लूट करने वाले गिरोह का ₹10,000 का इनामिया शातिर बदमाश पुलिस मुठभेड़ में घायल/गिरफ्तार, कब्जे से अवैध असलहा व कारतूस बरामद- - शोक समाचार: जन अधिकार पार्टी के वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सिंह मौर्य का निधन, पार्टी में शोक की लहर - सोनभद्र पुलिस में बड़ी कार्रवाई: लापरवाही पर गाज, चार थाना प्रभारी लाइनहाजिर

नरेन्‍द्र मोदी 3 जनवरी 2026 को पिपरावा के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे

“लोटस लाइट: रेलिक्स ऑफ द अवेकेंड वन” में प्रत्यावर्तित अवशेषों और संबंधित प्राचीन वस्तुओं का प्रदर्शन किया जाएगा

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Wednesday, December 31, 2025

Narendra Modi to inaugurate the exhibition of sacred relics of Piprahwa on January 3, 2026

नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय “लोटस लाइट: रेलिक्स ऑफ द अवेकेंड वन” शीर्षक से एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक प्रदर्शनी का आयोजन कर रहा है, जिसमें पूजनीय पिपरावा अवशेषों के साथ-साथ उनसे संबंधित महत्वपूर्ण प्राचीन वस्तुओं का प्रदर्शन किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी बुद्ध की शिक्षाओं के साथ भारत के अटूट सभ्यतागत संबंध और अपनी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और प्रस्तुति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा 3 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में किया जाएगा। यह आयोजन भारत के सांस्कृतिक और राजनयिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि प्रदर्शित अवशेषों में अत्यधिक ऐतिहासिक, पुरातात्विक और आध्यात्मिक महत्व के प्रत्यावर्तित पवित्र अवशेष शामिल हैं, जिनका विश्व भर के बौद्ध समुदायों द्वारा सम्मान किया जाता है।

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में खोजे गए पिपरावा अवशेषों को व्यापक रूप से गौतम बुद्ध के पार्थिव अवशेषों से संबंधित माना जाता है, जिन्हें शाक्य वंश द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था। इनका प्रत्यावर्तन और सार्वजनिक प्रदर्शन भारत द्वारा अपनी सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करने और बुद्ध की शिक्षाओं में निहित शांति, करुणा और ज्ञान के सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

इस प्रदर्शनी में शामिल होंगी:

पवित्र पिपरावा अवशेष और संबंधित प्राचीन वस्तुएं
इनके ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और पुरातात्विक संदर्भों को उजागर करने वाली सुनियोजित प्रदर्शनियां
भारत को बौद्ध धर्म का उद्गम स्थल बताते हुए व्याख्यात्मक कथाए
यह प्रदर्शनी विद्वानों, भक्‍तों और आम जनता सभी के लिए सोच-समझकर तैयार की गई है।

खबरें और भी

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले