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भूपेंद्र यादव ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण समस्या से निपटने के लिए राजस्थान एवं पंजाब की कार्य योजनाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

आगामी मौसम में स्पष्ट परिणाम सुनिश्चित करने के लिए निश्चित जवाबदेही के साथ क्षेत्रवार लक्षित कार्य योजनाएं

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Tuesday, January 6, 2026

Bhupender Yadav chairs meeting to review action plans of Rajasthan and Punjab to tackle air pollution problem in Delhi-NCR

नई दिल्ली। भूपेंद्र यादव ने आज दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण समस्या से निपटने के लिए राजस्थान एवं पंजाब की राज्य सरकारों की कार्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह अपनी तरह की समीक्षाओं की श्रृंखला में पांचवीं बैठक थी, जो मंत्री द्वारा तीन दिसंबर 2025 को आयोजित पिछली समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार निर्धारित मापदंडों एवं प्रारूपों पर आयोजित की गई थी।

दिल्ली-एनसीआर में पूरे वर्ष खराब रहने वाली वायु गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए मंत्री ने कहा कि जनवरी 2026 से कार्य योजनाओं की समीक्षा हर महीने मंत्री स्तर पर की जाएगी। मंत्री ने निर्देश दिया कि क्षेत्रवार लक्षित कार्य योजनाएं तैयार की जाएं एवं संबंधित विभागों को इनको कार्यान्वयित करने की स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी जाए। चूंकि कार्य योजनाएं आठ महीने पहले ही तैयार की जा रही हैं इसलिए उनके कुशल कार्यान्वयन से अगले मौसम में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं को उच्च स्तरीय अंतर-राज्यीय समन्वय बैठकों के माध्यम से दूर किया जाएगा।

भूपेंद्र यादव ने राजस्थान की विस्तृत कार्य योजना की समीक्षा करते हुए अलवर, भिवाड़ी, नीमराना एवं भरतपुर में सार्वजनिक परिवहन की कमियों को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता के आधार पर खरीदा जाएगा, और एक समय-सीमा अनुसार प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर भी चार्जिंग संरचना को मिशन मोड में बढ़ाया जाएगा। भिवाड़ी और नीमराना में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अनियोजित ट्रक पार्किंग की समस्या को एक गंभीर मुद्दा बताया गया, जिसके लिए तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है, जिसमें पार्किंग स्थल की पहचान एवं भीड़भाड़ से बचने के लिए पार्किंग योजना तैयार करना शामिल है।

मंत्री ने इच्छा व्यक्त किया कि अलवर, भिवाड़ी, नीमराना और भरतपुर के लिए शहर-विशिष्ट सड़क पुनर्विकास योजनाएं प्रस्तुत की जाएं। ट्रैफिक जाम वाले स्थानों की पहचान होनी चाहिए और अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक यातायात अवरोधन निवारण योजनाएं तैयार करनी चाहिए। परंपरागत अपशिष्ट निवारण के लिए एक व्यापक योजना विकसित करनी चाहिए और जहां भी अंतराल पहचाने गए हैं, वहां त्वरित रूप से मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें (एमआरएसएम) तैनात की जानी चाहिए। यह जानकारी प्रदान की गई कि सामुदायिक भागीदारी के साथ सड़क किनारे हरियाली को बढ़ावा देने के प्रयासों के अंतर्गत अलवर एवं भिवाड़ी में वृक्षारोपण के लिए 600 स्थानों की पहचान की गई है।

भूपेंद्र यादव ने निर्देश दिया कि जिन औद्योगिक इकाइयों ने ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) स्थापित नहीं की है, उन्हें तत्काल बंद करने के नोटिस जारी किया जाए। इसके अलावा, सूचना एवं संचार आयोग (आईईसी) की गतिविधियों में क्षेत्र-विशिष्ट हितधारकों की भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, जैसे उत्सर्जन नियंत्रण के लिए औद्योगिक इकाइयों के साथ, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के पृथक्करण एवं प्रसंस्करण के लिए निवासी कल्याण संघों के साथ आदि। मंत्री ने इच्छा व्यक्त किया कि स्थानीय प्रजातियों के पौधों का उपयोग करते हुए मिशन मोड में हरित गतिविधियां चलायी जाए।

भूपेंद्र यादव ने पंजाब की प्रस्तुति का अवलोकन करते हुए इस बात पर बल दिया कि सभी फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों की कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करना चाहिए और उनका कुशलतापूर्वक उपयोग करना चाहिए। इसे सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने मशीनों की कार्यशील स्थिति को प्रमाणित करने के लिए मानक परिचालन (एसओपी) तैयार करने की बात की। मंत्री ने कृषि मंत्रालय से हितधारकों एवं वैज्ञानिकों के परामर्श से फसल अवशेषों का प्रभावी प्रबंधन और पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए नवीन उपायों पर विचार-विमर्श करने का आग्रह किया।

मौजूदा उपायों की प्रभावशीलता पर आत्म-परीक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। पेलेटाइजेशन संयंत्रों को प्रोत्साहित करना चाहिए और फसल अवशेषों का उपयोग तापीय विद्युत संयंत्रों एवं ईंट भट्टों में किया जाना चाहिए। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सबसे पर्यावरण-अनुकूल समाधान के रूप में संपीड़ित जैव गैस संयंत्रों की स्थापना पर बल दिया गया। फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए ड्रोन आधारित निगरानी को भी प्रोत्साहित किया गया।

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