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जर्जर विद्यालय भवन बच्चों को खूले में पढ़ना मुस्किल मजबूर है शिक्षक बड़ा हादसा होने का सम्भावना

सुस्मित मुन्ना संवाददाता सुपौल बिहार सुपौल/छातापुर। ग्वालपाड़ा पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मी सरदार टोला इन दिनों बदहाल स्थिति से जूझ रहा है। विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत टूटने के कारण आए दिन मलबा गिरता रहता है, जिससे बच्चे कक्षाओं में बैठने से

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Tuesday, November 25, 2025

The dilapidated school building makes it difficult for children to study in the open; teachers are forced to do so, there is a possibility of a major accident.

सुस्मित मुन्ना संवाददाता सुपौल बिहार

सुपौल/छातापुर। ग्वालपाड़ा पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मी सरदार टोला इन दिनों बदहाल स्थिति से जूझ रहा है। विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत टूटने के कारण आए दिन मलबा गिरता रहता है, जिससे बच्चे कक्षाओं में बैठने से डरते हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि शिक्षकों को बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

विद्यालय में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके चलते छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं विद्यालय में कागजात रखने के लिए भी सुरक्षित कमरा उपलब्ध नहीं है। प्रधानाध्यापक अजीत कुमार यादव ने बताया कि भवन मरम्मत और आवश्यक सुविधाओं की मांग को लेकर कई बार लिखित आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से विद्यालय की इस गंभीर स्थिति पर अविलंब ध्यान देने, भवन निर्माण, शौचालय, सुरक्षित कक्ष और अन्य आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।विद्यालय में 160 से अधिक बच्चे नामांकित हैं, लेकिन भवन की भयावह स्थिति के कारण प्रतिदिन मात्र 60–65 बच्चे ही उपस्थित हो पाते हैं। अभिभावक भवन गिरने के डर से बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने से कतराते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दस वर्षों से विद्यालय इसी बदहाल हालत में है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।

विद्यालय में वर्तमान में दो शिक्षिकाएँ और एक प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय निवासी एवं भूतपूर्व मुखिया के पुत्र इंजीनियर प्रीतम प्रशांत पिक्कू ने कहा कि “हमने कई बार मीडिया माध्यमों से इस समस्या को उजागर करने का प्रयास किया, फिर भी आज तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। बच्चों के भविष्य और भवन की स्थिति को देखकर हम बेहद चिंतित हैं।”

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